एमएमडीआर संशोधन से झारखंड में विकास और रोजगार की नई संभावनाएं : खनिज संपदा को जनकल्याण से जोड़ने पर जोर: बी डी राम
लोकसभा ने विधेयक को 12 अगस्त और राज्यसभा ने 13 अगस्त को पारित किया है।

मेदिनीनगर : पलामू के सांसद बीडी राम ने अपने निवास स्थान में प्रेस वार्ता कर कहा की संसद से पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को झारखंड के लिए खनिज संसाधनों, रोजगार और औद्योगिक विकास की नई संभावनाओं से जोड़ते हुए वक्ता ने कहा कि राज्य को अपनी खनिज संपदा का केवल मालिक नहीं, बल्कि सबसे बड़ा लाभार्थी बनना चाहिए। लोकसभा ने विधेयक को 12 अगस्त और राज्यसभा ने 13 अगस्त को पारित किया है।
श्री राम ने कहा कि झारखंड में कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, चूना पत्थर, डोलोमाइट और ग्रेफाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के विशाल भंडार हैं। राज्य का खनिज राजस्व बंद नहीं हो रहा है और रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, DMF, NMET तथा GST में राज्य की हिस्सेदारी बनी रहेगी।
उन्होंने झारखंड में नीलाम किए गए खनिज ब्लॉकों को शीघ्र चालू करने तथा करीब ₹19,000 करोड़ DMF राशि का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, अस्पताल, स्कूल, सिंचाई, कौशल विकास और रोजगार पर करने की मांग की।
Palamu और Garhwa के संदर्भ में उन्होंने खनिज आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने, बंद औद्योगिक इकाइयों पुनरुद्धार तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास की ठोस योजना बनाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि झारखंड को केवल “Mining State” नहीं, बल्कि “Mineral-Based Industrial State” बनाना होगा। खनिजों के स्थानीय प्रसंस्करण, उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग से रोजगार तथा राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
उन्होंने झारखंड सरकार से पांच मांगें रखते हुए कहा कि सभी नीलाम खनिज ब्लॉकों को समयबद्ध तरीके से चालू किया जाए, DMF राशि का सार्वजनिक ऑडिट हो, Palamu-Garhwa के लिए विशेष खनिज आधारित औद्योगिक योजना बने, बंद औद्योगिक परिसंपत्तियों को पुनर्जीवित किया जाए तथा DMF और CSR को स्थानीय युवाओं के रोजगार एवं कौशल विकास से जोड़ा जाए।
उन्होंने कहा कि “खनिज संपदा झारखंड की ताकत है और इसे रोजगार, उद्योग तथा जनकल्याण में बदलना हमारी जिम्मेदारी है।”