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फार्मेसी कॉलेजों की जांच रिपोर्ट पर उठा पर्दा, सूचना नहीं मिलने पर JRPA ने भेजा प्रथम अनुस्मारक

रिपोर्ट: VBN News Desk46 मिनट पहलेझारखण्ड

डी-फार्मा और बी-फार्मा संस्थानों की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग तेज, स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर सवाल

फार्मेसी कॉलेजों की जांच रिपोर्ट पर उठा पर्दा, सूचना नहीं मिलने पर JRPA ने भेजा प्रथम अनुस्मारक

रांची/जमशेदपुर : झारखंड में संचालित डी-फार्मा और बी-फार्मा संस्थानों की जांच रिपोर्ट को लेकर अब पारदर्शिता का मुद्दा गहराने लगा है। झारखंड रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट एसोसिएशन (JRPA) ने स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग से सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी अब तक उपलब्ध नहीं कराए जाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन ने विभाग को प्रथम अनुस्मारक भेजते हुए शीघ्र सूचना उपलब्ध कराने की मांग की है। JRPA की ओर से 22 अप्रैल 2026 को पत्र संख्या JRPA/20/2026 के माध्यम से जन सूचना पदाधिकारी, स्वास्थ्य विभाग, झारखंड सरकार को आवेदन भेजा गया था। आवेदन में राज्य में संचालित डी-फार्मा एवं बी-फार्मा कॉलेजों की जांच से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी गई थी। यह आवेदन स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव विद्यानंद शर्मा पंकज द्वारा 1 अगस्त 2025 को जारी उस आदेश पत्र के संदर्भ में था जिसमें राज्य के फार्मेसी संस्थानों की जांच के लिए सदस्यीय जांच समिति गठित किए जाने का उल्लेख किया गया था। आदेश पत्र में कहा गया था कि विभिन्न फार्मेसी संस्थानों और महाविद्यालयों द्वारा पाठ्यक्रम संचालन को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों के मद्देनजर विभागीय स्तर पर जांच समिति का गठन किया गया था जिसे यह जांच करनी थी कि संबंधित संस्थान फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) के निर्धारित मानकों और विभागीय प्रावधानों के अनुरूप संचालित हो रहे हैं या नहीं। JRPA ने सूचना के अधिकार के तहत जांच समिति से संबंधित संपूर्ण अभिलेख, जांच प्रतिवेदन, जांच में शामिल संस्थानों की सूची, संबंधित कॉलेजों के खिलाफ की गई अथवा प्रस्तावित कार्रवाई तथा अनुपालन प्रतिवेदन की प्रतियां मांगी थीं। संगठन का कहना है कि यह विषय फार्मेसी शिक्षा की गुणवत्ता, छात्रों के भविष्य और जनहित से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। हालांकि आवेदन दिए जाने के बाद निर्धारित समयसीमा बीत जाने के बावजूद विभाग की ओर से कोई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। इतना ही नहीं विभाग द्वारा किसी प्रकार का आधिकारिक उत्तर भी नहीं दिया गया। इसके बाद JRPA ने 28 मई 2026 को प्रथम अनुस्मारक भेजते हुए सूचना उपलब्ध कराने की मांग दोहराई है। एसोसिएशन के सचिव मानस मुखर्जी ने कहा कि संगठन के सभी सदस्य झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल में विधिवत पंजीकृत फार्मासिस्ट हैं और संगठन राज्य में फार्मेसी शिक्षा की गुणवत्ता एवं नियामकीय पारदर्शिता को लेकर लगातार सक्रिय है। उन्होंने कहा कि यदि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होती है तो राज्य में संचालित फार्मेसी संस्थानों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और छात्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। मामले को लेकर अब फार्मेसी शिक्षा जगत में भी चर्चा तेज हो गई है। संगठन ने स्वास्थ्य विभाग से सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप जल्द कार्रवाई करते हुए मांगी गई सभी सूचनाएं उपलब्ध कराने की मांग की है ताकि पूरे मामले का पारदर्शी और विधिसम्मत निस्तारण सुनिश्चित हो सके।

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