ताज़ा-ख़बर

कुचाई सीएचसी की बदहाल व्यवस्था उजागर, इमरजेंसी सेवा से लेकर पेयजल और साफ-सफाई तक गंभीर सवाल

रिपोर्ट: MANISH 2 दिन पहलेझारखण्ड

बिना डॉक्टर इमरजेंसी, अस्पताल परिसर में निजी कैंटीन संचालन पर उठे सवाल, स्वास्थ्य प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप

कुचाई सीएचसी की बदहाल व्यवस्था उजागर, इमरजेंसी सेवा से लेकर पेयजल और साफ-सफाई तक गंभीर सवाल

कुचाई : सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आए हैं। अस्पताल में इमरजेंसी चिकित्सा व्यवस्था, चिकित्सकों की उपलब्धता, साफ-सफाई, पेयजल संकट और अस्पताल परिसर में संचालित निजी कैंटीन को लेकर स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। जानकारी के अनुसार अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड का मुख्य प्रवेश द्वार अधिकांश समय बंद रहता है और आपातकालीन मरीजों का उपचार प्रसव वार्ड के बाहर लगाए गए बेड पर किया जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सर्पदंश जैसे गंभीर मामलों के लिए आवश्यक एंटी-वेनम दवा भी उपलब्ध नहीं रहती जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बताया जा रहा है कि ओपीडी बंद होने के बाद अस्पताल की व्यवस्था मुख्य रूप से एएनएम के भरोसे संचालित होती है। एएनएम के अनुसार ड्यूटी के बाद चिकित्सक अस्पताल परिसर के आवास में रहते हैं और आवश्यकता पड़ने पर फोन से बुलाए जाते हैं। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) तथा भारतीय लोक स्वास्थ्य मानक (IPHS) के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता और आवश्यक चिकित्सकीय व्यवस्था सुनिश्चित किया जाना अपेक्षित है। अस्पताल परिसर में झाड़ियां उग आने और नियमित साफ-सफाई नहीं होने की भी शिकायतें सामने आई हैं। हालांकि मच्छरों से बचाव के लिए फॉगिंग कराए जाने की बात कही जा रही है। दूसरी ओर अस्पताल परिसर के दो कमरों में निजी कैंटीन संचालन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कैंटीन में रेट चार्ट प्रदर्शित नहीं है और ग्राहकों को बिल या रसीद भी नहीं दी जाती। स्थानीय लोग यह भी जानना चाहते हैं कि अस्पताल परिसर में निजी कैंटीन संचालन की अनुमति किस स्तर से दी गई तथा संचालक को चिकित्सकों के आवासीय परिसर में रहने की अनुमति किन नियमों के तहत मिली। अस्पताल में पेयजल संकट भी बरकरार बताया जा रहा है। तीन बोरिंग और एक डीप बोरिंग के बावजूद पर्याप्त जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर अस्पताल की व्यवस्थाओं में शीघ्र सुधार सुनिश्चित करे ताकि क्षेत्रवासियों को गुणवत्तापूर्ण और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। फिलहाल इन सभी आरोपों पर अस्पताल प्रबंधन या स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

इन्हें भी पढ़ें.