मनसाडीह ओपी पर फिर उठे सवाल, आदिवासी युवक से मारपीट के आरोप पर तीर-धनुष के साथ ग्रामीणों का प्रदर्शन
पुलिस पर दुर्व्यवहार का आरोप, एसडीपीओ ने शुरू कराई जांच, दोषी पाए जाने पर लाइन क्लोज की बात

गिरिडीह : जिले के तिसरी प्रखंड स्थित लोकाय थाना क्षेत्र के मनसाडीह ओपी की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ओपी में पदस्थापित एएसआई घनश्याम हेम्ब्रम पर एक आदिवासी युवक के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार का आरोप लगने के बाद ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। रविवार को बड़ी संख्या में आदिवासी महिला-पुरुष पारंपरिक तीर-धनुष, डुगडुगी और मांदर के साथ सड़क पर उतर आए तथा पुलिस अधीक्षक से कड़ी कार्रवाई की मांग की। पीड़ित प्रकाश मुर्मू ने आरोप लगाया कि शनिवार रात वह अपने घर आए मेहमानों के साथ भोजन कर रहा था। इसी दौरान सिविल ड्रेस में पहुंचे एएसआई घनश्याम हेम्ब्रम ने एक व्यक्ति का घर पूछते हुए कथित रूप से गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई। प्रकाश की पत्नी रीना हेम्ब्रम ने भी पुलिसकर्मी पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। प्रकाश का कहना है कि कुछ देर बाद 8 से 10 पुलिसकर्मी वर्दी में पहुंचे और उसे जबरन ओपी ले जाने का प्रयास किया। शोर सुनकर बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं मौके पर पहुंच गईं। ग्रामीणों के विरोध के बाद पुलिस टीम को बिना युवक को साथ लिए लौटना पड़ा। हालांकि एएसआई घनश्याम हेम्ब्रम ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि वह गुप्त सूचना के आधार पर जांच के लिए गांव गए थे और पूछताछ के दौरान प्रकाश मुर्मू ने ही उनके साथ हाथापाई की। घटना के विरोध में रविवार को ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर एएसआई के तत्काल ट्रांसफर या लाइन क्लोज करने की मांग उठाई। उनका कहना था कि कानून की रक्षा करने वाली पुलिस यदि स्वयं कानून का उल्लंघन करेगी तो आम लोगों का भरोसा कैसे कायम रहेगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए खोरीमहुआ एसडीपीओ अमरेंद्र कुमार स्वयं तिलकमारन गांव पहुंचे। उन्होंने पीड़ित, ग्रामीणों और संबंधित पक्षों से बातचीत कर जांच शुरू करने की जानकारी दी। एसडीपीओ ने कहा कि मामले की रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक को भेजी जाएगी और यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित एएसआई के विरुद्ध लाइन क्लोज या अन्य विभागीय कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों का आरोप है कि मनसाडीह ओपी का विवादों से पुराना नाता रहा है और पहले भी पुलिसकर्मियों पर मारपीट तथा दुर्व्यवहार के आरोप लग चुके हैं। भाजपा नेता सुनील साव ने भी घटना की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि वर्दी की आड़ में किसी को भी कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। फिलहाल मामले में दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे किए हैं। घटना की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और समयबद्ध कार्रवाई ही पुलिस व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है।