सेफ्टी टैंक बना मौत का कुआं, महुआ शराब के अवैध कारोबार ने ली मां-बेटे समेत तीन की जान
हजारीबाग हादसे ने खोली अवैध शराब धंधे की पोल, जहरीली गैस से परिवार उजड़ा, प्रशासन पर उठे सवाल

हजारीबाग : जिले के कटकमदाग थाना क्षेत्र अंतर्गत कुद वार्ड नंबर 24 में मंगलवार को हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। एक घर के सेफ्टी टैंक में बनी जहरीली गैस की चपेट में आने से मां-बेटे समेत तीन लोगों की मौत हो गई जबकि परिवार का एक अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि सेफ्टी टैंक का उपयोग अवैध महुआ शराब की चुलाई और भंडारण के लिए किया जा रहा था। मृतकों की पहचान चमेली देवी, उनके पुत्र रवि साव और मदन साव के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार लंबे समय से टैंक में महुआ शराब रखी जा रही थी जिससे अंदर जहरीली गैस भर गई थी। मंगलवार को चमेली देवी शराब निकालने के उद्देश्य से टैंक में उतरीं लेकिन कुछ ही देर में बेहोश हो गईं। मां को बचाने के लिए बेटा रवि साव अंदर गया लेकिन वह भी गैस की चपेट में आ गया। इसके बाद मदन साव दोनों को बाहर निकालने के लिए टैंक में उतरे पर वे भी बाहर नहीं निकल सके। तीनों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना के दौरान परिवार के मुखिया आनंद साव भी बचाव कार्य में शामिल हुए और जहरीली गैस से गंभीर रूप से प्रभावित हो गए। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में मातम और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से महुआ शराब का अवैध कारोबार चल रहा था। आरोप है कि कई स्थानों पर खुलेआम शराब की चुलाई और बिक्री होती रही लेकिन प्रशासन और उत्पाद विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि घनी आबादी वाले इलाके में आखिर इतने लंबे समय तक अवैध शराब का कारोबार कैसे चलता रहा। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्ती दिखाई होती तो तीन लोगों की जान बचाई जा सकती थी। स्थानीय नागरिकों ने पुलिस और उत्पाद विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। घटना की सूचना मिलते ही कटकमदाग थाना प्रभारी सरोज कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है तथा मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं वार्ड नंबर 24 के वार्ड पार्षद प्रतिनिधि दिलीप साव ने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए उच्चस्तरीय जांच और अवैध शराब कारोबार पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। विशेषज्ञों के अनुसार सेफ्टी टैंक या बंद स्थानों में लंबे समय तक जैविक पदार्थों के सड़ने और किण्वन से मिथेन, कार्बन मोनोऑक्साइड एवं अन्य जहरीली गैसें बन जाती हैं। बिना सुरक्षा उपकरण और पर्याप्त ऑक्सीजन व्यवस्था के ऐसे टैंकों में उतरना जानलेवा साबित हो सकता है। यही कारण है कि सुरक्षा मानकों के तहत किसी भी बंद टैंक में प्रवेश से पहले गैस जांच और सुरक्षा उपकरण अनिवार्य माने जाते हैं। इस हादसे ने न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ दिया बल्कि अवैध शराब कारोबार और प्रशासनिक लापरवाही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।