श्री बंशीधर नगर मंदिर व बभंडी राधा कृष्ण मंदिर को श्री कृष्ण सर्किट से जोड़ा जाए : सांसद
केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मिलकर सांसद ने रखी मांग कहा -पलामू किला को किया जाए राष्ट्रीय धरोहर घोषित

मेदिनीनगर (पलामू) : पलामू के सांसद बीडी राम ने केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से मुलाकात कर श्री बंशीधर नगर मंदिर व पलामू जिला के चैनपुर स्थित बभंडी राधा कृष्ण मंदिर को श्री कृष्ण सर्किट से जोड़़ने का अनुरोध किया। साथ ही पलामू व्याघ्र क्षेत्र के बेतला नेशनल पार्क स्थित पलामू किला, कमलदह झील, केचकी, इको स्ट्रीट व मलय डैम को पर्यटन विकास व पलामू किला को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की। बीडी राम ने मंत्री शेखावत से कहा कि गढ़वा जिला झारखण्ड राज्य के उत्तर पश्चिम में स्थित है। बिहार के रोहतास, उत्तर प्रदेश का सोनभद्र व छतीसगढ़ का सरगुजा जिलों की सीमाएं इससे लगती है। इसलिए इसे कभी गेटवे ऑफ छोटानागपुर कहा जाता था। झारखण्ड की राजधानी रांची से गढ़वा जिले की दूरी 205 किलोमीटर है। गढ़वा से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर नगर उंटारी अनुमंडल स्थित है। वहां शताब्दियों से प्राचीन श्री बंशीधर मंदिर स्थित है। मंदिर में राधा व कृष्ण की साढ़े चार फीट उंची व बतीस मन की स्वर्ण निर्मित एक अत्यंत मोहक प्रतिमा विराजमान है। यह अद्भुत प्रतिमा भूमि में गड़े शेषनाग के फन पर निर्मित चौबीस पंखुड़ियों वाले विशाल कमल पर विराजमान है। श्री वंशीधर मंदिर देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र रहा है। नगर उंटारी गढ़ के मुख्य द्वार के पास स्थित मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की चार फीट उंची व 32 मन वजनी (1280 किलो) प्रतिमा भक्तों का मन मोह लेती है। पहली बार उनकी पहल पर 2017 से श्री वंशीधर महोत्सव मनाया गया। उक्त महोत्सव को झारखण्ड सरकार ने राजकीय महोत्सव घोषित किया है। इसके साथ-साथ नगर उंटारी स्थित श्री वंशीधर मंदिर के ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व को देखते हुए झारखण्ड सरकार व गृह मंत्रालय, भारत सरकार ने उनके अनुरोध पर उक्त स्थान का नगर उंटारी नाम की जगह श्री वंशीधर नगर किया जा चुका है। अभी हाल में नगर उटांरी स्टेशन पर रेल मंत्री जी ने उनके अनुरोध पर रांची- नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस का ठहराव की स्वीकृति दी है। सांसद ने कहा कि चैनपुर बभंडी राधा कृष्ण मंदिर सरोवर के मध्य स्थित यह मंदिर क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए गहरी धार्मिक व सांस्कृतिक आस्था का केंद्र है। विदित है कि इस ऐतिहासिक मंदिर की स्थापना वर्ष 1930 में हुई थी। पलामू के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. रघुवंश नारायण सिंह व स्थानीय जिला प्रशासन के प्रयासों से मंदिर का जीर्णोद्धार का कार्य किया गया है। इसके ऐतिहासिक व आध्यात्मिक महत्व को संरक्षित रखने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। जिस प्रकार से श्री बंशीधर नगर महोत्सव को राजकीय महोत्सव घोषित किया गया है, उसी प्रकार श्रद्धालुओं एवं इस क्षेत्र की स्थानीय जनता के द्वारा बभंडी में राधा कृष्ण महोत्सव का आयोजन कराने की मांग लगातार की जा रही है। इससे इस मंदिर को एक प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसे श्री बंशीधर नगर मंदिर से जोड़कर एक व्यापक राधा कृष्ण धार्मिक पर्यटन सर्किट का हिस्सा बनाएं जाने की आवश्यकता है। इस क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं है। इससे आर्थिक व सांस्कृतिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। कहा कि पलामू व्याघ्र क्षेत्र के अंतर्गत ऐतिहासिक पलामू किला अवस्थित है। चेरो वंश (आदिवासी) के राजा प्रताप राय ने सन् 1628 में पुराना किला का निर्माण कराया था। तत्पश्चात 1658 में राजा मेदिनी राय के द्वारा नए किले का अधूरा निर्माण कराया गया था। चेरो वंश के राजाओं ने मुगल साम्राज्य व ब्रिटिश शासन के हस्तक्षेप से पलामू को बचा कर रखा था। राजा मेदिनीराय सामाजिक एकता के प्रतीक थे, उनके लोकोक्ति धन्य- धन्य राजा मेदिनीया, घर- घर बजे मथनिया... अर्थात उनके शासन काल में सर्वत्र खुशहाली थी। झारखंड राज्य पहाड़ों, जंगलों, नदियों व खूबसूरत झीलों से अच्छादित प्रदेश है। यहां का एक महत्वपूर्ण भूभाग के अंतर्गत पलामू प्रमंडल के तीनों जिले क्रमशः पलामू, गढ़वा व लातेहार है। वहां खनिज संपदाओं व प्राकृतिक संपदाओं से भी परिपूर्ण है। पलामू प्रमंडल के लातेहार जिला अंतर्गत बेतला व्याघ्र योजना देश के प्रथम व्याघ्र परियोजनाओं में से एक है। राजा मेदिनीराय की धरोहर, पलामू किला व पलामू व्याघ्र क्षेत्र को पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए पुराने व नए पलामू किले को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करते हुए पुरातत्व विभाग, भारत सरकार के द्वारा किला का रख-रखाव, जीर्णोधार व सौदर्यीकरण व पुरातत्व विभाग, भारत सरकार की सूची में शामिल कराने के लिए आवश्यक कदम उठाये जायें। साथ ही साथ मलय डैम, कमलदह झील, केचकी इको रिट्रीट को भी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाय। सांसद ने बताया कि मंत्री शेखावत ने सकारात्मक आश्वासन दिया। साथ ही संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया। साथ ही उक्त संबंध में अग्रसर कार्रवाई के लिए झारखण्ड सरकार से प्रस्ताव भिजवाने को कहा।