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सावन विशेष : कोकदा का श्री श्री महाकालेश्वर मंदिर - जहां हर पत्थर में बसते हैं भोलेनाथ

रिपोर्ट: VBN News Desk9 घंटे पहलेआर्टिकल

आसनबनी रेलवे स्टेशन के पश्चिम केबिन से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर आज हजारों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बन चुका है।

सावन विशेष : कोकदा का श्री श्री महाकालेश्वर मंदिर - जहां हर पत्थर में बसते हैं भोलेनाथ

सौरभ कुमार, जादूगोड़ा

सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना का सर्वोत्तम काल माना जाता है। इस दौरान शिवालयों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड स्थित कोकदा का श्री श्री महाकालेश्वर मंदिर (साधु डेरा) भी ऐसा ही एक दिव्य और आस्था का केंद्र है जहां श्रद्धालु मानते हैं कि हर पत्थर में शिव का वास है और हर बूंद में मां गंगा का आशीर्वाद। आसनबनी रेलवे स्टेशन के पश्चिम केबिन से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर आज हजारों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बन चुका है। लगभग साढ़े तीन वर्ष पूर्व मंदिर का वर्तमान स्वरूप तैयार हुआ लेकिन इसकी धार्मिक मान्यता लगभग 350 वर्ष पुरानी बताई जाती है।

गाय के दूध से प्रकट हुआ स्वयंभू शिवलिंग

स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार प्राचीन समय में यह पूरा इलाका घने जंगलों से आच्छादित था। गांव के चरवाहे अपनी गायों को चराने यहां लाते थे। एक समय ऐसा आया जब गायें घर लौटने पर दूध देना बंद कर देती थीं। ग्रामीणों ने जब निगरानी की तो देखा कि गायें जंगल में एक पत्थर के ऊपर स्वतः अपना दूध अर्पित कर रही हैं। ग्रामीणों ने जब उस पत्थर को हटाने का प्रयास किया और कुल्हाड़ी से प्रहार किया, तो उसमें दरार पड़ गई। उसी रात एक चरवाहे को स्वप्न में भगवान शिव ने दर्शन देकर बताया कि वह कोई साधारण पत्थर नहीं बल्कि पाताल से प्रकट स्वयंभू शिवलिंग है। तभी से यहां पूजा-अर्चना शुरू हुई। शिवलिंग पर आज भी मौजूद दरार उस अद्भुत घटना की साक्षी मानी जाती है।

गुप्त गंगा का दिव्य चमत्कार

मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थित गुप्त गंगा है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां से निकलने वाली जलधारा कभी नहीं सूखती। इसी पवित्र जल से प्रतिदिन भगवान महाकालेश्वर का अभिषेक किया जाता है। कुदरा नदी के समीप स्थित यह स्थान चारों ओर हरियाली और प्राकृतिक शांति से घिरा हुआ है जो साधना और ध्यान के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।

साधु डेरा के नाम से प्रसिद्ध

समय के साथ अनेक साधु-संतों ने यहां तपस्या की। इसी कारण यह स्थान 'साधु डेरा' के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मंदिर में भगवान शिव के साथ माता पार्वती की भी विधिवत स्थापना की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां आने वाला हर श्रद्धालु आत्मिक शांति का अनुभव करता है। स्थानीय अजय सिंह बताते हैं कि गुप्त गंगा का जल कभी नहीं सूखता और यह महादेव की कृपा का प्रत्यक्ष प्रमाण है। वहीं महेंद्र कुमार का कहना है कि यहां सच्चे मन से आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं। रणजीत सिंह भी मानते हैं कि बाबा भोलेनाथ सभी भक्तों पर अपनी विशेष कृपा बरसाते हैं।

सावन और महाशिवरात्रि में उमड़ती है भक्तों की भीड़

सावन के पूरे महीने यहां हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि पर मंदिर परिसर में पूरी रात भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक और विशेष आरती का आयोजन होता है। दीपों की रोशनी, धूप-बेलपत्र की सुगंध और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो जाता है।

आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम

कोकदा का श्री श्री महाकालेश्वर मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि श्रद्धा, परंपरा और चमत्कार का जीवंत प्रतीक है। यहां की हर कथा शिवभक्ति से ओत-प्रोत है और हर श्रद्धालु अपने साथ एक अलग आध्यात्मिक अनुभव लेकर लौटता है। मीडिया से बातचीत में चंदन शर्मा ने कहा कि यदि सावन के इस पावन अवसर पर कोई व्यक्ति महादेव की दिव्यता, आत्मिक शांति और असीम कृपा का अनुभव करना चाहता है तो उसे एक बार अवश्य इस पवित्र साधु डेरा पहुंचना चाहिए। क्योंकि यहां हर पत्थर में शिव हैं, हर बूंद में गंगा है और हर धड़कन में गूंजता है - हर-हर महादेव।

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