डॉक्टरों का राज्यभर में विरोध-प्रदर्शन 21 अक्टूबर को, 22 से कार्य बहिष्कार की चेतावनी
-चिकित्सा समुदाय की राज्यस्तरीय संयुक्त बैठक में 7 सूत्री साझा एजेंडा तय
- सुरक्षा, क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में बदलाव, डीएसीपी, आयुष्मान भुगतान और जूनियर डॉक्टरों के मुद्दे प्रमुख

By Sudhir
रांची | झारखंड के चिकित्सक संगठन अब लंबित मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन करेंगे। रविवार को रांची में हुई राज्य स्तरीय संयुक्त चिकित्सा बैठक में 7 सूत्री साझा एजेंडा तय किया गया। इसके तहत 9 अक्टूबर को राज्यभर में ब्लैक बैज कार्यक्रम, 21 अक्टूबर को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन और मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में 22 अक्टूबर से सम्पूर्ण कार्य बहिष्कार की घोषणा की गई है।
आंदोलन में सरकारी और गैर-सरकारी चिकित्सकों की संयुक्त भागीदारी की बात कही गई है। बैठक में विभिन्न चिकित्सा संगठनों के प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। विस्तृत चर्चा के बाद कॉमन मिनिमम प्रोग्राम (सीएमपी) को साझा एजेंडे के रूप में स्वीकार किया गया। संगठनों ने राज्य सरकार से लंबित मुद्दों पर समयबद्ध और ठोस कार्रवाई की मांग की।
सुरक्षा से लेकर स्वास्थ्य संस्थानों के नियमन तक मांगें चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। संगठनों ने चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और चिकित्सा संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, हिंसा की घटनाओं में त्वरित कानूनी कार्रवाई तथा झारखंड मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की है। सरकारी और निजी चिकित्सकों, जूनियर डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों और महिला चिकित्सकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में भी व्यावहारिक संशोधन की मांग की गई है। चिकित्सा संगठनों के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा गठित दो उच्चस्तरीय समितियों ने झारखंड की भौगोलिक और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए 50 बेड तक के छोटे और मध्यम अस्पतालों, नर्सिंग होम तथा क्लिनिक को एक्ट के दायरे से मुक्त रखने की अनुशंसा की है।
डीएसीपी और जूनियर डॉक्टरों के मुद्दे भी एजेंडे में सरकारी चिकित्सकों के लिए केंद्र सरकार और बिहार की तर्ज पर समयबद्ध करियर प्रोग्रेशन और डीएसीपी लागू करने तथा प्रमोशन में देरी खत्म करने की मांग की गई है। जूनियर डॉक्टरों के बॉन्ड एसआर का समय पर वेतन भुगतान, मातृत्व अवकाश और लाभ, कॉन्ट्रैक्चुअल समस्याओं का समाधान, ‘झारखंड फर्स्ट’ नीति और नियमित व पारदर्शी भर्ती कैलेंडर लागू करने की मांग भी रखी गई है। आयुष्मान भारत/पीएम-जेएवाई के तहत उचित पैकेज दर, समय पर भुगतान और एचईएम 2.0 के लंबित दावों के निपटारे की मांग की गई है। इसके अलावा अस्पताल लाइसेंस, स्वीकृति, नवीनीकरण और नियामकीय अनुपालन के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था तथा मेडिकल छात्रों को समय पर स्टाइपेंड देने की मांग की गई है। निजी मेडिकल कॉलेजों में स्टाइपेंड से अनधिकृत कटौती रोकने की भी मांग की गई।
9 अक्टूबर से जन-जागरूकता अभियान आंदोलन की शुरुआत संगठनात्मक तैयारियों से होगी। 27 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जॉइंट एक्शन कमेटी, नोडल प्रतिनिधियों और जिला समन्वयकों की नियुक्ति के साथ संयुक्त ज्ञापन तैयार किया जाएगा। 5 से 8 अक्टूबर तक ‘हम आंदोलन क्यों कर रहे हैं?’ अभियान चलाया जाएगा। पैम्फलेट, डिजिटल लीफलेट, सोशल मीडिया, डॉक्टरों के वीडियो और कम्युनिटी आउटरीच के माध्यम से मांगों की जानकारी जनता तक पहुंचाई जाएगी। 9 अक्टूबर को राज्यभर में ब्लैक बैज कार्यक्रम होगा। रांची में राज्य स्तरीय और विभिन्न जिलों में जिला स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी। 10 से 20 अक्टूबर तक जिलों में डॉक्टरों की बैठक और स्थानीय लंबित मुद्दों का संकलन होगा। चिकित्सा संगठनों ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य चिकित्सकों की सुरक्षा, सम्मानजनक कार्य वातावरण, पारदर्शी नियामकीय व्यवस्था और राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है। संगठनों ने स्पष्ट किया कि पेशेंट केयर उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
** मांगों का उद्देश्य विरोध नहीं, संवाद से व्यावहारिक समाधान हासिल करना है: डॉ अभिषेक रामाधीन** बैठक के दौरान डॉ. अभिषेक रामाधीन ने कहा कि झारखंड के चिकित्सा समुदाय की राज्यस्तरीय संयुक्त बैठक में राज्य के नौ चिकित्सक संगठनों के प्रतिनिधियों ने साझा एजेंडे और चरणबद्ध संयुक्त कार्यक्रम पर सहमति जताई है। चिकित्सकों की सुरक्षा, क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में व्यावहारिक संशोधन, सरकारी चिकित्सकों के लिए डीएसीपी और समयबद्ध करियर प्रोग्रेशन, जूनियर डॉक्टरों की समस्याएं, आयुष्मान भारत के लंबित भुगतान, अस्पतालों के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था और मेडिकल छात्रों से जुड़े मुद्दे केवल चिकित्सकों से संबंधित नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा असर राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य किसी व्यवस्था का केवल विरोध करना नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से व्यावहारिक और स्थायी समाधान हासिल करना है। 21 अक्टूबर तक प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में संयुक्त निर्णय के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। पूरे अभियान में पेशेंट केयर हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। सरकार से सकारात्मक संवाद और समयबद्ध समाधान की अपेक्षा है, ताकि झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके।