बायो-मेडिकल वेस्ट पर सख्त होगी निगरानी, झारखंड में बनेगी नई व्यापक गाइडलाइन
नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई, अस्पतालों का पंजीकरण तक हो सकता है रद्द

रांची : झारखंड राज्य में बायो-मेडिकल वेस्ट के सुरक्षित और वैज्ञानिक निस्तारण को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में इस दिशा में कई अहम निर्णय लिए गए। बैठक में झारखंड के लिए एक नई कॉम्प्रिहेंसिव गाइडलाइन तैयार करने का निर्णय लिया गया जो सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप होगी। यह गाइडलाइन राज्य के सभी सरकारी एवं निजी अस्पतालों पर समान रूप से लागू होगी। अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि कचरा प्रबंधन में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा क्योंकि इससे पर्यावरण और आम जनता के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न होता है। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में राज्य में पांच कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी कार्यरत हैं जहां कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा रहा है। नई गाइडलाइन के तहत इस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाएगा। नई प्रणाली में कचरे के उठाव से लेकर अंतिम निस्तारण तक बारकोडिंग और जीपीएस ट्रैकिंग को अनिवार्य किया जाएगा ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह बने। साथ ही बिना उपचार वाले बायो-मेडिकल कचरे को 48 घंटे से अधिक समय तक संग्रहित करने पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाएगा। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें पर्यावरण मुआवजा दंड के साथ-साथ संबंधित संस्थान का पंजीकरण रद्द करने तक की कार्रवाई शामिल होगी। सरकार का मानना है कि इस नई पहल से राज्य में बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन की व्यवस्था अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और प्रभावी बनेगी जिससे पर्यावरण संरक्षण और जन-स्वास्थ्य दोनों को मजबूती मिलेगी।