हाइवा से टंडवा-केरेडारी सड़क जाम, आखिर कब मिलेगी आम राहगीरों को निजात?
जनता का सीधा सवाल है—हाइवा चलते रहेंगे, लेकिन आम आदमी कब चैन से चलेगा?

टंडवा/केरेडारी: कोयला ढुलाई में लगे हाइवा और भारी वाहनों के दबाव ने टंडवा-केरेडारी मुख्य सड़क पर यातायात व्यवस्था की कमर तोड़ दी है। आए दिन लगने वाले घंटों के जाम से आम राहगीर, स्कूली बच्चे, मरीज और स्थानीय ग्रामीण परेशान हैं। हालात यह हैं कि सड़क पर सफर करना लोगों के लिए परेशानी और जोखिम दोनों बनता जा रहा है।
सवाल यह है कि आखिर आम जनता को इस जाम से कब तक जूझना पड़ेगा? जब कोयला परिवहन से जुड़े वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, तो प्रशासन और संबंधित परियोजना प्रबंधन की ओर से यातायात को सुचारू रखने के लिए ठोस व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही? हाल ही में टंडवा-केरेडारी-पिपरवार मार्ग पर करीब 10 घंटे तक जाम रहने की खबर सामने आई थी।
जाम में एंबुलेंस और मरीजों के फंसने से समस्या की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। स्थानीय स्तर पर कार्रवाई और समाधान की मांग लगातार उठ रही है। प्रशासन को अब यह तय करना होगा कि कोयला ढुलाई भी निर्बाध चले और आम जनता का आवागमन भी बाधित न हो। सिर्फ बैठक, आश्वासन और चेतावनी से समस्या का समाधान नहीं होगा; सड़क पर प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन और जिम्मेदारी तय करने की जरूरत है।
जनता का सीधा सवाल है—हाइवा चलते रहेंगे, लेकिन आम आदमी कब चैन से चलेगा?