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विधानसभा में बिजली आपूर्ति और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता जांच का मुद्दा उठा

रिपोर्ट: VBN News Desk2 घंटे पहलेझारखण्ड

विधायक ने सरकार से शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था और बिजली बहाली की समय-सीमा स्पष्ट करने की मांग की।

विधानसभा में बिजली आपूर्ति और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता जांच का मुद्दा उठा

रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 12वें दिन गुरुवार को डुमरी विधायक जयराम महतो ने सदन में राज्य में बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर जलने या बिजली के तार खराब होने के बाद लंबे समय तक बिजली बहाल नहीं हो पाती, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

विधायक ने सरकार से शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था और बिजली बहाली की समय-सीमा स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को यह भी स्पष्ट नहीं होता कि ट्रांसफार्मर जलने, तार टूटने या अन्य तकनीकी खराबी की स्थिति में वे अपनी शिकायत कहां दर्ज कराएं। साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि निर्धारित समय के भीतर समस्या का समाधान नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की जाती है।

इस मुद्दे पर विपक्ष के सदस्यों ने भी उनका समर्थन किया। विधायक नवीन जायसवाल ने कहा कि बिजली मुफ्त की व्यवस्था नहीं है, उपभोक्ता इसके लिए भुगतान करते हैं, इसलिए उन्हें बेहतर सेवा मिलना उनका अधिकार है। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर कहीं ट्रांसफार्मर जल जाता है तो उसे 24 घंटे के भीतर बदलने की व्यवस्था होनी चाहिए।

इस पर जवाब देते हुए मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने सदन में स्वीकार किया कि कई बार ट्रांसफार्मर जलने के बाद उसे बदलने में दिक्कत आती है। उन्होंने बताया कि विभाग में ट्रांसफार्मरों की कमी के कारण समय पर उनकी उपलब्धता नहीं हो पाती, जिससे बिजली बहाली में देरी हो जाती है। मंत्री ने यह भी कहा कि उपभोक्ता अपनी शिकायत एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और डिवीजन कार्यालय में दर्ज करा सकते हैं। साथ ही गर्मी के मौसम को देखते हुए विभाग जल्द ही एक टोल-फ्री नंबर जारी करेगा, ताकि लोग आसानी से बिजली से जुड़ी शिकायत दर्ज करा सकें।

इसी दौरान विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन ने राज्य में कृषि एवं वन उत्पादों के लिए मानक गुणवत्ता प्रयोगशाला नहीं होने का मुद्दा सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि झारखंड में अदरक, महुआ, कटहल और टमाटर समेत कई प्रकार के फल-सब्जियों तथा कृषि उत्पादों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है, लेकिन गुणवत्ता परीक्षण की सुविधा नहीं होने के कारण किसानों को वैश्विक बाजार का लाभ नहीं मिल पाता।

विधायक ने सरकार से मांग की कि राज्य में कृषि और वन उत्पादों की मैपिंग कर एक स्पष्ट योजना तैयार की जाए और उनके वैश्विक बाजार में खपत का आकलन किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि रांची और देवघर हवाई अड्डे पर मानक गुणवत्ता प्रयोगशाला स्थापित की जाए, ताकि निर्यात से पहले उत्पादों की जांच हो सके और किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिल सके।

इस पर जवाब देते हुए कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि भविष्य में गुणवत्ता परीक्षण की आवश्यकता को देखते हुए विभाग ने इस संबंध में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है। आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकार इस दिशा में आगे पहल कर किसानों को सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास करेगी।

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