मनोज सिंह, नीरा देवी व लाल बाबू के खिलाफ नहीं है मैदान में एक भी उम्मीदवार, निर्विरोध पार्षद जीतना तय
इन वार्ड में सबसे पहले वार्ड नंबर 23 से मेदिनीनगर नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष रहे मनोज सिंह अपना पर्चा भरा था।

मेदिनीनगर (पलामू) : मेदिनीनगर नगर निगम चुनाव इस बार बहुत ही दिलचस्प होने जा रहा है। यहां एक तरफ मेयर पद के लिए संघर्ष की स्थिति नजर आ रही है। वहीं वार्ड पार्षद भी किसी से कम नजर नहीं आ रहे हैं। सभी के बीच कड़ा मुकाबला नजर आ रहा है। लेकिन कुछ ऐसे वार्ड हैं, जिसमें बुधवार को नामांकन की अंतिम तिथि तक तीन वार्ड से मात्र एक-एक प्रत्याशियों ने पर्चा दाखिल किया है। उनके विरुद्ध एक भी प्रत्याशियों ने नामांकन नहीं भरा। अब इनका निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है।
इन वार्ड में सबसे पहले वार्ड नंबर 23 से मेदिनीनगर नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष रहे मनोज सिंह अपना पर्चा भरा था। इनके खिलाफ एक भी उम्मीदवार नामांकन के अंतिम दिन तक नामांकन नही किया। यह उनकी लोकप्रियता, जनता के प्रति समर्पण व उनके द्वारा किए गए कामों का ही नतीजा नजर आ रहा है कि लोग इनके खिलाफ मैदान में नहीं उतरे। यहां यह लिख देना मुनासिब होगा कि ये पार्षद बनकर डिप्टी मेयर भी बन सकते हैं। मनोज सिंह के खिलाफ अगर एक भी उम्मीदवार उनके खिलाफ चुनावी मैदान में नहीं है तो फिर यह उनकी लोकप्रियता, सामाजिक क्षेत्र में किए गए कार्यों का नतीजा है। जिसे जनता भी स्वीकार करती है।
वार्ड नंबर 5 से चर्चित समाजसेवी राजू तिर्की की पत्नी नीरा देवी जो निवर्तमान पार्षद भी हैं। इन्होंने भी अपने कार्यकाल में अपने क्षेत्र में विकास की एक लंबी रेखा खींची है। साथ ही बराबर हर लोगों के सुख-दुख में साथ निभाया है। उनके पति राजू तिर्की के द्वारा किए गए सामाजिक कार्य का नतीजा है कि उनके भी खिलाफ एक भी प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं है। इनका भी निर्विरोध जीता जाना सुनिश्चित है।
वार्ड 29 के निवर्तमान पार्षद नवीन कुमार गुप्ता उर्फ लाल बाबू की, तो तीनों ने अपने पिछले कार्यकाल में कुछ ऐसा कार्यों का कमाल दिखाया है कि जनता उनके काम की कायल है। इन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान जनता के हर समस्याओं को दूर करने का काम किया है। सबसे बड़ी उनकी खासियत है कि ये मृदीभाषी मिलनसार, हंसमुख स्वभाव के एक बेहतर इंसान हैं। शायद यही कारण है कि किसी ने उनके खिलाफ पर्चा दाखिल नहीं किया। झारखंड या देश में बहुत ही काम ऐसे जनप्रतिनिधि होते हैं, जिनके खिलाफ कोई भी चुनावी मैदान में नहीं उतरता है। इनमें मनोज सिंह, नीरा देवी व लाल बाबू ने बाजी मारी है। इस बात की चर्चा सिर्फ निगम क्षेत्र व पलामू में नहीं बल्कि पूरे झारखंड में हो रही है। आगे क्या होगा यह तो चुनाव के गर्भ में छुपा हुआ है। लेकिन इतना तो तय है कि उनकी लोकप्रियता इतना सर चढ़कर बोल रहा है कि उनके खिलाफ एक भी उम्मीदवार चुनाव मैदान में नहीं है।