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171वें हूल दिवस पर पूर्वजों के बलिदान को किया गया नमन, जल-जंगल-जमीन की रक्षा का लिया संकल्प

रिपोर्ट: MANISH 1 घंटे पहलेझारखण्ड

कृष्णा बास्के बोले - शिक्षा से होगा समाज सशक्त, कालीपद सोरेन ने आदिवासी एकता और अधिकारों की रक्षा का किया आह्वान

171वें हूल दिवस पर पूर्वजों के बलिदान को किया गया नमन, जल-जंगल-जमीन की रक्षा का लिया संकल्प

राजनगर : सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड क्षेत्र के बोतोरबेरा फुटबॉल मैदान में 171वें वीर शहीद सिद्धो-कान्हू हूल दिवस सह सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन पारंपरिक उत्साह और आदिवासी संस्कृति की गरिमा के साथ किया गया। कार्यक्रम स्थल पर संथाली (ओलचिकी) भाषा में लगाए गए बैनर के माध्यम से वीर सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव तथा फूलो-झानो के ऐतिहासिक बलिदान को याद करते हुए समाज को अपनी संस्कृति, भाषा और अधिकारों की रक्षा का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि झामुमो के केंद्रीय सदस्य कृष्णा बास्के ने कहा कि सिद्धो-कान्हू का हूल आंदोलन केवल अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह नहीं था बल्कि जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अस्मिता की रक्षा का महान आंदोलन था। उन्होंने कहा कि आज समाज को शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से आगे बढ़ने की आवश्यकता है। शिक्षित समाज ही अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है और विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकता है। झामुमो के वरिष्ठ नेता कालीपद सोरेन ने कहा कि हूल दिवस हमें अपने वीर पूर्वजों के संघर्ष, त्याग और बलिदान की याद दिलाता है। उन्होंने समाज से एकजुट रहने, अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने तथा आने वाली पीढ़ी को इतिहास से परिचित कराने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पूर्वजों के आदर्शों पर चलकर ही झारखंड और आदिवासी समाज को मजबूत बनाया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, पारंपरिक गीत-संगीत और सामूहिक श्रद्धांजलि के माध्यम से वीर शहीदों को नमन किया गया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आदिवासी समाज के लोगों ने भाग लेकर हूल आंदोलन के महानायकों के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की।

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