यूसीआईएल के 50 वर्षों के विकास दावों पर सवाल, इचड़ा मौजा आज भी सामुदायिक भवन की सुविधा से वंचित
स्थानीय ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश, सामुदायिक केंद्र पर रोक और सीएसआर योजनाओं की उपेक्षा पर उठे सवाल

रिपोर्ट : सौरभ कुमार
जादूगोड़ा : यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) के पांच दशक से अधिक लंबे सफर के बावजूद जादूगोड़ा क्षेत्र के इचड़ा मौजा में आज तक एक भी समुचित सामुदायिक भवन का निर्माण नहीं हो सका है। इस मुद्दे को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कंपनी क्षेत्र में विकास और कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत अनेक योजनाएं चलाने का दावा करती है लेकिन इचड़ा मौजा की एक महत्वपूर्ण और बुनियादी जरूरत को लगातार नजरअंदाज किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में शादी-विवाह, श्राद्धकर्म, सामाजिक बैठकें और अन्य सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए निजी मैरिज हॉल या होटल बुक करना आसान नहीं है। ऐसे में सामुदायिक भवन की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार यूसीआईएल कॉलोनी स्थित सामुदायिक केंद्र वर्षों तक क्षेत्रवासियों के लिए राहत का माध्यम था। निर्धारित प्रक्रिया और अंडरटेकिंग के आधार पर गैर-कर्मचारी भी इसका उपयोग सामाजिक कार्यक्रमों के लिए कर सकते थे। लेकिन लगभग पांच माह पूर्व इस व्यवस्था को बंद कर दिया गया और अब यह सुविधा केवल कंपनी कर्मचारियों तक सीमित कर दी गई है। इससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी निराशा है। ग्रामीणों का तर्क है कि यदि किसी प्रकार की प्रशासनिक या सुरक्षा संबंधी समस्या थी तो नियमों को सख्त किया जा सकता था, निगरानी बढ़ाई जा सकती थी या अतिरिक्त शर्तें लागू की जा सकती थीं। लेकिन आम लोगों के लिए पूरी व्यवस्था बंद कर देना उचित समाधान नहीं माना जा सकता। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब सामुदायिक केंद्र का उद्देश्य ही समाज की सेवा है तो स्थानीय समुदाय को उससे वंचित क्यों किया गया। इचड़ा मौजा के लोगों ने यूसीआईएल प्रबंधन से मांग की है कि स्थानीय लोगों के लिए सामुदायिक केंद्र की सुविधा पुनः शुरू की जाए तथा सीएसआर मद से क्षेत्र में एक आधुनिक और स्थायी सामुदायिक भवन का निर्माण कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि विकास तभी सार्थक होगा जब उसका लाभ उन लोगों तक भी पहुंचे जो कंपनी के सबसे निकट रहते हैं लेकिन सुविधाओं से अब भी दूर हैं। यह मुद्दा अब केवल एक भवन का नहीं बल्कि क्षेत्र के सैकड़ों परिवारों की सामाजिक आवश्यकताओं और वर्षों पुरानी उम्मीदों का बन चुका है।