विजयश्री ऑटोकॉम के त्रिपक्षीय समझौते पर बवाल, रश्मि भेंगरा ने कहा- श्रमिकों के हक पर डाका, अवैध समझौता तत्काल हो रद्द
1 अप्रैल से लागू होनी थी नई मजदूरी, अगस्त से लागू करने पर क्यों बनी सहमति? रश्मि भेंगरा ने श्रम विभाग व प्रबंधन की भूमिका पर उठाए सवाल

गम्हरिया : विजयश्री ऑटोकॉम लिमिटेड में हाल ही में हुए त्रिपक्षीय समझौते को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता रश्मि भेंगरा ने समझौते को श्रमिकों के अधिकारों के खिलाफ बताते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि समझौते में झारखंड सरकार के श्रम विभाग की अधिसूचना की अनदेखी कर श्रमिकों के वैधानिक अधिकारों से समझौता किया गया है। रश्मि भेंगरा ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि झारखंड सरकार के श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग द्वारा 25 मई 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार राज्य के सभी प्रतिष्ठानों में 1 अप्रैल 2026 से संशोधित न्यूनतम मजदूरी लागू करना अनिवार्य किया गया था। इसके बावजूद विजयश्री ऑटोकॉम में झामुमो प्रतिनिधिमंडल, इसरो प्रतिनिधि और कंपनी प्रबंधन के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते में नई मजदूरी दर अगस्त 2026 से लागू करने पर सहमति बनाई गई जो सरकारी नियमों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि यदि संशोधित मजदूरी अप्रैल के बजाय अगस्त से लागू होती है तो श्रमिकों को अप्रैल से जुलाई तक के चार महीनों की वेतन वृद्धि से वंचित होना पड़ेगा। उनके अनुसार यह गरीब मजदूरों की मेहनत की कमाई पर सीधा डाका है और श्रमिकों के संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों का उल्लंघन है। रश्मि भेंगरा ने सत्ता पक्ष के नेताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार में रहते हुए यदि सरकारी अधिसूचनाओं का पालन नहीं कराया जा रहा है तो यह बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि श्रमिक हितों की रक्षा करने के बजाय नियमों की अनदेखी कर समझौता करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कंपनी प्रबंधन के साथ-साथ प्रशासनिक तंत्र की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि सरकारी अधिसूचना पहले से प्रभावी थी तो भविष्य की तिथि से मजदूरी लागू करने पर सहमति कैसे बनी। सबसे गंभीर पहलू यह है कि यह मिनट्स ऑफ मीटिंग श्रम प्रवर्तन अधिकारी की उपस्थिति में तैयार किया गया। ऐसे में संबंधित श्रम अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। रश्मि भेंगरा ने मांग की कि विवादित त्रिपक्षीय समझौते को तत्काल निरस्त कर 1 अप्रैल 2026 से संशोधित न्यूनतम मजदूरी लागू की जाए तथा श्रमिकों को पिछले चार महीनों का बकाया वेतन अंतर एकमुश्त भुगतान किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि श्रमिकों को उनका वैधानिक अधिकार नहीं मिला तो श्रमिक हित में व्यापक और उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।