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डायन बिसाही के आरोप में महिला से मारपीट, न्याय को भटकती पीड़िता - इंचागढ़ पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

रिपोर्ट: MANISH 1 दिन पहलेझारखण्ड

कानून होते हुए भी खामोश थाना, डायन प्रताड़ना के मामलों में पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल

डायन बिसाही के आरोप में महिला से मारपीट, न्याय को भटकती पीड़िता - इंचागढ़ पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

गम्हरिया : सरायकेला-खरसावां जिले में अंधविश्वास के खिलाफ सरकार और जिला प्रशासन द्वारा लगातार जागरूकता अभियान, नुक्कड़ नाटक और सभाओं के आयोजन के बावजूद डायन बिसाही की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला इंचागढ़ थाना क्षेत्र के गौरांगकोचा गांव से सामने आया है जहां डायन प्रताड़ना से पीड़ित महिला बिजल कालिंदी न्याय की तलाश में बिरवास स्थित पद्मश्री छुटनी महतो परिवार परामर्श केंद्र पहुंची। पीड़िता बिजल कालिंदी ने बताया कि रविवार, 21 दिसंबर 2025 की रात करीब साढ़े आठ बजे सागर कालिंदी, सचिन कालिंदी उर्फ बाबूलाल, शिवम कालिंदी सहित 10-12 लोग नशे की हालत में उनके घर पहुंचे। आरोपियों ने उनकी मां की तरह उन्हें भी डायन विद्या सीखने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने उनके बच्चे को बीमार कर दिया है। जान से मारने की धमकी देते हुए आरोपियों ने बिजल कालिंदी के साथ बेरहमी से मारपीट की। शोर सुनकर जब बच्चे बाहर आए तो आरोपी मौके से फरार हो गए, जाते समय अपनी चप्पल और टोपी भी छोड़ गए। मारपीट में गंभीर रूप से घायल बिजल कालिंदी ने इलाज कराया और स्वस्थ होने के बाद न्याय की उम्मीद लेकर परामर्श केंद्र पहुंचीं। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी गांव के दबंग हैं और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने के कारण अवैध कारोबार में भी संलिप्त हैं जिससे उनकी थाना पुलिस से सांठगांठ है। पीड़िता के बड़े बेटे रविंद्र कालिंदी ने बताया कि यह पहला मामला नहीं है। वर्ष 2020, 2022 और 2023 में भी डायन बिसाही के आरोप में परिवार को प्रताड़ित किया गया लेकिन हर बार थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार कर दिया। ताजा घटना के बाद 22 दिसंबर 2025 को भी जब थाना गए तो पुलिस ने कथित तौर पर कहा कि केस लड़ने के लिए पैसे हैं क्या, केस करने से कुछ नहीं होगा। समाजसेवी अवधेश मुर्मू ने इसे कानून का खुला मजाक बताया। उन्होंने कहा कि झारखंड में डायन प्रथा निवारण अधिनियम 2001, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 115, 351, एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम जैसे सख्त कानून मौजूद हैं जिनमें दोषियों को कड़ी सजा का प्रावधान है इसके बावजूद पुलिस की उदासीनता पीड़ितों का मनोबल तोड़ रही है। वहीं पद्मश्री छुटनी महतो ने पुलिस के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि डायन प्रताड़ना के मामलों में अक्सर थाना स्तर पर टालमटोल की जाती है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक पीड़िता को न्याय नहीं मिलेगा वह इस लड़ाई को जिला से राज्य और जरूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री स्तर तक ले जाएंगी। यह मामला एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि जब कानून मौजूद हैं तो आखिर पुलिस उन्हें लागू करने से पीछे क्यों हट रही है और कब तक पीड़ित महिलाएं न्याय के लिए दर-दर भटकती रहेंगी।

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